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Wednesday, December 4, 2019

December 04, 2019

दुनिया कि पहला इन्टरनेट नेटवर्क कहा से शुरू हुआ और भारत मे कब शुरू हुआ



इन्टरनेट आज के समय मे बहोत जरूरी बन गया है आज हमारा भविष्य भी उस पर ही निर्भर है जब इन्टरनेट नही था तब जरूरी डेटा और माहिती का आदान प्रदान करने मे बहोत मुश्केली होती थी लेकिन अब इन्टरनेट ने उसको और सरल बना दिया है इन्टरनेट कि शोध मात्र एक व्यक्ति कि देन नही है समय के साथ अनेक लोकोने अपना योगदान दिया है और संशोधन किया है सन्‌ 1969 मे इन्टरनेट का उपयोग सबसे पहेले अमेरिका के सैन्य के लिये किया गया था अमेरिका डिफेन्स आर्मी का ध्येय निष्णात द्वारा किये जाने वाले संशोधन एक दुसरे के साथ शेर कर सके लेकिन कोइ और देख न शके एसी सिस्टम को बनाना था 1969 मे दुनिया का पहला इन्टरनेट नेटवर्क ARPANET [Advanced Research Project Agency Network] बना था जो कि केलिफोर्निया युनिवर्सिटीने बनाया था

Wednesday, May 29, 2019

May 29, 2019

क्या आप जानते है केलकुलेटर का आविष्कार किसने किया था ?


कैलकुलेटर, आज हम सभी की जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। कैलुकेटर ने गणना को बेहद आसान बना दिया है। कैलकुलेटर से न सिर्फ आज छात्र बड़े-बड़े न्यूमेरिकल आसानी से हल कर लेते हैं, बल्कि दुकानदार और घरेलू महिलाएं भी लेन-देन से संबंधित हिसाब एवं गणना इसकी मद्द से आसानी से कर लेते हैं।
कैलकुलेटर की उपयोगिता को देखते हुए आजकल स्मार्टफोन और कम्प्यूटर में भी यह उपलब्ध है। वहीं जहां पहले बड़ी-बड़ी गणनाओं को करने में काफी वक्त लगता था और संख्याओं का जोड़ना, घटाना काफी मुश्किल हुआ करता था।

Friday, April 12, 2019

April 12, 2019

हवाइ जहाज मे ये ब्लेक बोक्स क्यु लगाया जाता है जानिए



बेहद कम लोगों को यह बात मालूम होगी कि ब्लैक बॉक्स क्या होता है? जिन्हें यह मालूम है कि ये क्या चीज है, हो सकता है उन्हें ये पता नहि कि लाल रंग होने के बावजूद ये ब्लैक बॉक्स क्यों कहलाता है..? दरअसल इसके पीछे कई रोचक कारण छुपे हुए हैं। इन्हें जानकर आपको ताज्जुब तो होगा ही साथ में आपका ज्ञानवर्धन भी होगा...

मगर आगे बढ़ने से पहले आपको बताना चाहेंगे कि हम आपको ये जानकारी इसलिए देना चाहते हैं क्योंकि ये जानना जरूरी है कि ब्लैक बॉक्स क्या है जिससे दुर्घटना के कारण का पता चल जाता है।

Monday, September 3, 2018

September 03, 2018

क्या आप अपने मोबाइल से DSLR जितनी क्लिन फोटोग्राफ कि आशा रखते है तो जानिए इस डिवाइस के बारे मे....



अगर, आपके पास सस्ता बजट स्मार्टफोन है और आप अपने स्मार्टफोन से DSLR की क्वालिटी वाला तस्वीर खींचना चाहते हैं तो इसके लिए आपको नया फोन खरीदने की जरूरत नहीं है। आप केवल 300 रुपये के खर्च पर अपने बजट स्मार्टफोन को DSLR बना सकते हैं। आजकल ज्यादातर लोग अपना स्मार्टफोन कैमरे की बजह से बदल रहे हैं। कम बजट वाले या फिर पुराने स्मार्टफोन में आप एक्सटर्नल लेंस का इस्तेमाल करके DSLR क्वालिटी की तस्वीर निकाल सकते हैं।

Friday, August 31, 2018

August 31, 2018

बदल गया तेज ऐप का नाम, नए ऐप से पा सकेंगे बैंक लोन जानिए पुरी बात



Google की ओर से ‘Google for India 2018’ नाम से मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित इवेंट में Tez ऐप का नाम बदलने की घोषणा की गई। अब तेज ऐप का नाम Google pay कर दिया गया है। इस ऐप के माध्यम से अब लोन की भी सुविधा मुहैया कराई जाएगी। इसके लिए गूगल देश के प्रमुख बैंकों के साथ साझेदारी करेगा। 

तेज ऐप का नाम बदलने के अलावा गूगल ने इसके फीचर्स में कोई और बदलाव नहीं किया है। इस वजह से जब नाम बदलकर गूगल पे होगा, तब भी तेज यूजर्स को वही होम स्क्रीन, बिल पेमेंट लिंक और कॉन्टैक्ट्स आदि मिलेगा। गूगल ने इवेंट में घोषणा की कि गूगल पे इन-स्टोर और ऑनलाइन विकल्पों के माध्यम से ऑनलाइन पेमेंट को बढ़ावा देगा। 

सबसे खासबात यह है कि गूगल पे के माध्यम से यूजर्स देश के प्रमुख बैंकों से लोन के लिए भी अप्लाई कर पाएंगे। ऐप में आने वाले अपडेट के से प्री-अप्रूव्ड लोन के लिए अप्लाई किया जा सकेगा। इस सर्विस के लिए गूगल फेडरल बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा समेत अन्य बैंकों के साथ साझेदारी करेगा। 

अभी 1.2 मिलियन यानी 12 लाख छोटे व्यवसायी तेज ऐप इस्तेमाल करते हैं। अब कंपनी दिवाली तक 1.5 लाख रिटेल स्टोर्स को पार्टनर बनाने की तैयारी में है। तेज अपग्रेड के बारे में बताते हुए Google इंडिया, प्रॉडक्ट मैनेजमेंट के वाइस प्रेसिडेंट सीजर सेनगुप्ता ने कहा कि भारत में ऐप बनाने का मतबल है कि गूगल दुनियाभर के यूजर्स के लिए ऐप का बनाएगा। सेनगुप्ता के इस बयान से अंदाजा लगाया जा रहा है कि गूगल पे वर्ल्डवाइड ऐप भारत के ऐप मॉडल पर आधारित होगा। 

बता दें कि फिलहाल 22 मिलियन यूजर्स इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं। कंपनी का दावा है कि पिछले साल सितंबर में लॉन्चिंग के बाद से अभी तक 750 मिलियन ट्रांजैक्शन इस ऐप के माध्यम से किए गए हैं। 

इसके अलावा घोषणा की गई कि गूगल ऐंड्रॉयड गो में दो नए फीचर्स भी जोड़े गए हैं। इन फीचर्स से अब गो यूजर्स को दो भाषाओं में न्यूज फीड और ऑडियो प्लेबैक आर्टिकल्स चुनने की सुविधा मिलेगी। गूगल वायस असिस्टेंट अब अंग्रेजी और हिंदी के अलावा मराठी भी सपॉर्ट करेगा। गूगल के मैप्स गो ऐप के साथ टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन फीचर जोड़ा गया है। गूगल मैप्स के इस वर्जन में अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साथ भी वॉयस नेविगेशन फीचर काम करेगा। 

Wednesday, August 15, 2018

August 15, 2018

भारत में पहली बार, कैसे कब आईं ये 10 चीजें जिन्होंने बदल दी भारतवासियों की जिंदगी


अपने देश को आजाद हुए 71 साल पूरे होने जा रहे हैं। भारत ने करीब हजार साल तक गुलामी झेली है और भारत इस दुनिया का ऐसा देश है जिसने कभी दूसरे पर पहले हमला नहीं किया। हजार सालों तक गुलामी झेलने के बाद अकसर यही कहा जाने लगा कि भारत कभी तरक्की नहीं कर सकता या यूं कहें कि भारत को हमेशा से ही बाकी देशों से कमजोर माना जाने लगा। लेकिन भारत ने अकेल अपने दम पर ऐसी उपलब्धियां हासिल कीं, जो शायद ही कोई हासिल कर पाया हो।

भारत के मुकाबले दुनिया में टेक्नोलॉजी ज्यादा तेजी से आई और तेजी से बढ़ी, लेकिन फिर भी भारत ने खुदको काबिल बनाने के लिए दुनिया के बाकी देशों से मदद मांगने की बजाय अपनी मेहनत पर भरोसा दिखाया। 72वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आज हम आपको कुछ ऐसे ही बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो भारत ने अपने बलबूते हासिल की।



1. 1953 में आया था पहला कंप्यूटर :पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थित भारतीय सांख्यिकी संस्थान में भारत का पहला कंप्यूटर बनाया गया जो एक छोटी एनालॉग डिवाइस थी। इसका इस्तेमाल लिनियर इक्वेशन को सॉल्व करने के लिए किया जाता था। बाद में 1954-55 में भारत ने ब्रिटेन से 10 लाख रुपए में HEC-2M को खरीदा और इसे ही भारत का पहला कंप्यूटर माना जाता है। इस कंप्यूटर की लंबाई 10 फीट, चौड़ाई 7 फीट और ऊंचाई 6 फीच थी। इसमें कीबोर्ड, मॉनिटर, प्रोसेसर नहीं था और इसकी मेमोरी भी सिर्फ 3 केबी ही थी।

हालांकि, मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) में भारत का पहला कंप्यूटर बनाया गया था। इस कंप्यूटर पर 1955 से काम शुरू हुआ था और 1960 में ये बनकर तैयार हुआ था। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इस कंप्यूटर का नाम 'टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च ऑटोमैटिक केलकुलेटर (TIFRAC)' रखा। TIFRAC भारत का पहला कंप्यूटर था, जिसे भारत में ही बनाया गया था।


2. अमेरिका के मना करने के बाद बना पहला सुपर कंप्यूटर : कहा जाता है कि भारत ने अमेरिका से सुपर कंप्यूटर लेना चाहता था लेकिन अमेरिका ने भारत को इससे मना कर दिया। जिसके बाद डॉक्टर विजय भाटकर ने स्वदेशी तकनीक की मदद से 1 जुलाई 1991 को पहला सुपर कंप्यूटर 'परम 8000' लॉन्च किया। इसके बाद 1998 में दूसरा सुपर कंप्यूटर 'परम 10000' लॉन्च किया गया।



3. जब पहली बार हुई फोन पर बात : बात 31 जुलाई 1995 की है जब भारत में पहली बार मोबाइल पर बात की गई। मोदी टेल्स्ट्रा भारत में मोबाइल सर्विस देने वाली पहली कंपनी थी, जिसने अपनी सर्विस का नाम 'मोबाइल नेट' रखा था। पहली बार मोबाइल फोन पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु और उस समय के केंद्रीय दूरसंचार मंत्री सुखराम के बीच बात हुई थी। इस कॉल को करने के लिए नोकिया 2110 का इस्तेमाल किया था। ये कॉल कोलकाता राइटर्स बिल्डिंग से दिल्ली के संचार भवन के बीच की गई थी।



4. 2009 में आया था पहला एंड्रॉयड स्मार्टफोन : ताईवानी कंपनी HTC ने 2008 में अमेरिका में दुनिया का पहला एंड्रॉयड स्मार्टफोन HTC T-Mobile G1 लॉन्च किया था। इसी फोन को HTC Dream के नाम से जून 2009 में भारत में लॉन्च किया गया। ये भारत का पहला ऐसा स्मार्टफोन था, जो गूगल के एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता था।



5. 42 साल पहले लॉन्च हुई थी पहली सैटेलाइट :भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) ने 19 अप्रैल 1975 को भारत की पहली सैटेलाइट 'आर्यभट्ट' को अंतरिक्ष में छोड़ा था। इसका वजन 358 किलोग्राम था, जिसे रूसी रॉकेट के मदद से भेजा गया था। भारत की पहली सैटेलाइट लॉन्च करने के पीछे इसरो के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय प्रोफेसर यूआर राव का दिमाग था और इन्हें सैटेलाइट क्रांति का जनक कहा जाता है। आर्यभट्ट के बाद जो दूसरी सैटेलाइट छोड़ी गई थी, उसका नाम 'भास्कर-1' था जिसका वजन 444 किलोग्राम था।



6. एटीएम के आविष्कारक का जन्म भारत में ही हुआ था :एटीएम को ऑटोमैटेड टेलर मशीन कहा जाता है और इसका अविष्कार जॉन शैफर्ड बैरोन ने किया था। जॉन का जन्म भारत के मेघालय राज्य में ही हुआ था। दुनिया में पहला एटीएम 27 जून 1967 को उत्तरी लंदन के इनफिल्ड में लगा था। वहीं भारत में पहला एटीएम सिटी बैंक और एचएसबीसी बैंक ने मुंबई में अपनी ब्रांच के पास सितंबर 1987 में लगाया था। जून 2016 तक के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 2 लाख 15 हजार 39 एटीएम थे।



7. आजाद भारत की पहली गाड़ी :आजादी से पहले तक भारत में अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों से कारों को इंपोर्ट किया जाता था। लेकिन आजाद भारत में पहली बार 1949 में हिंदुस्तान मोटर्स ने अपनी पहली कार लॉन्च की। हिंदुस्तान मोटर्स की स्थापना 1942 में बी.एम. बिड़ला ने की थी, लेकिन पहली कार 'हिंदुस्तान 10' का प्रोडक्शन 1949 तक शुरू नहीं हो पाया। हिंदुस्‍तान 10 मॉडल को ब्रि‍टि‍श मोरि‍स 10 के आधार पर बनाया गया था। इसके बाद साल 1950 में हिंदुस्‍तान मोटर ने मोरिस मि‍नर के आधार पर ‘बेबी हिंदुस्‍तान’ और हिंदुस्‍तान 12 को मोरि‍स 14 के आधार पर पेश कि‍या।



8. भारत की सबसे पहली बाइक :भारत में चलने वाली सबसे पहली मोटरसाइकल 350सीसी की पावरफुल बाइक रॉयल एनफील्ड बुलेट थी। जिसे इंग्लैंड से इम्पोर्ट कर मद्रास में असेंबल किया जाता था। लेकिन आजाद भारत में पहली बार 250 सीसी की टू-स्ट्रोक रेसिंग मोटरसाइकल 'जावा मोटरसाइकल' चलाई गई। ये बाइक पूरी तरह से भारत में ही तैयार की गई थी। 1960 में मैसूर शहर में फारूक ईरानी ने चेकोस्लोवाकिया की कंपनी जावा मोटर्स से लाइसेंस लेकर भारत में 'आइडियल जावा (इंडिया) लिमिटेड' की स्थापना की थी। इसके बाद सन् 1970 से 1990 तक पूरे 30 सालों तक इस बाइक का रेंसिंग मोटरसाइकलों में कोई मुकाबला नहीं था।



9. मुंबई से दिल्ली उड़ा था पहला प्लेन : भारत में एयरोप्लने लाने में जेआरडी टाटा का सबसे बड़ा योगदान रहा। 1929 में भारत के पहले लाइसेंस प्राप्त पायलट बने। इसके बाद 1932 में टाटा एविएशन नाम से 2 लाख रुपए की लागत से विमान कंपनी शुरू की। उन्होंने 1937 में पहली बार मुंबई से दिल्ली के बीच यात्री उड़ान भरी। 1946 में इस कंपनी के शेयर बेचने के साथ ही उसका नाम एयर इंडिया लिमिटेड रख दिया गया। एयर इंडिया और टाटा एक दूसरे के पर्याय है। देश के आजाद होने के बाद उनकी कंपनी ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स की सेवा भी देने शुरू कर दिया। गणतंत्र बनने के अगले ही साल सन् 1953 में एयर इंडिया समेत नौ और विमान कंपनियों का नेशनलाइज्ड कर दिया जिसका अध्यक्ष जेआरडी टाटा को बना दिया गया। जिसके बाद 1972 तक उन्होंने अध्यक्ष पद संभाला।



10. कोलकाता थी पहली मेट्रो सिटी :अंग्रेजों के जमाने में कोलकाता भारत की राजधानी हुआ करती थी और सबसे ज्यादा विकास भी यहीं पर हुआ। आजादी के बाद भारत में पहली बार मेट्रो ट्रेन की शुरुआत भी कोलकाता में ही हुई। 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कोलकाता मेट्रो का उद्घाटन किया। पहली मेट्रो ट्रेन 12 स्टेशन को कवर करती थी, जिसमें से 6 अंडरग्राउंड थे।